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डेट रेप ड्रग्स एक नशीली दवा होती है जो व्यक्ति को ऐसी स्थिति में पहुँचा सकती है जिसमें व्यक्ति का अपने शरीर पर कोई नियंत्रण नहीं रहता।
बलात्कार… काश यह शब्द शब्दकोश में होता ही नहीं। काश कि इस शब्द और उसकी परिभाषा को कभी किसी ने लिखा ही न होता। तो शायद यह भयानक शब्द समाज को पीड़ित न कर रहा होता।
महिलाओं पर शारीरिक हिंसा/शोषण और बलात्कार के मामलों की कोई कमी नहीं है और लगभग संसार का हर देश ऐसे अनगिनत मामलों को दर्ज करता है। घर, बाहर या कार्यस्थल या कोई भी स्थान ऐसा नहीं है जहाँ महिलाएँ असुरक्षित महसूस न करती हों।
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर रोज़ लगभग 88 रेप मामले सामने आते हैं और ये गिनती सिर्फ़ उन मामलों की है जो असल में सामने आते हैं या रिपोर्ट किए जाते हैं। उन घटनाओं की किसी के पास कोई गिनती नहीं जिनकी रिपोर्ट नहीं की जाती।
इस सब के बीच एक और गंभीर समस्या हमारे सामने पिछले कुछ सालों से उबरकर आ रही है जिसे हम डेट रेप के नाम से जानते हैं। भारत के मेट्रो शहर डेट रेप और उसके बाद के शोषण की घटनाओं से घिरते जा रहे हैं।
आधुनिक युग में डेटिंग एक बहुत सामान्य शब्द है। अब शादी का निर्णय करने से पहले महिला और पुरुष एक दूसरे को डेट करने में यकीन रखते हैं।
डेट का मतलब है एक दूसरे के साथ घूमना-फिरना, समय बिताना, एक दूसरे को समझना और परखना आदि। डेटिंग में कोई बुराई भी नहीं है। आखिरकार शादी जीवन का सबसे बड़ा और महत्त्वपूर्ण निर्णय होता है और इसे लेने से पहले अपने पार्टनर को अच्छी तरह जान-समझ लेने में कोई बुराई नहीं।
पर इस डेटिंग की आड़ में मेट्रो शहर की महिलाएँ असल में डेट रेप और शारीरक शोषण का शिकार बन रही हैं।
युवा वर्ग का एक हिस्सा पूरा हफ़्ता जुटकर काम करने के बाद शनिवार और इतवार को या तो आराम करना पसंद करता है या फिर क्लब या डिस्को में जाना और दोस्तों से मिलना या डेट पर जाना।
ऐसी किसी भी मुलाक़ात में कहीं किसी भी पुरुष मित्र या साथी का मंतव्य गलत हो सकता है। ड्रिंक में नशे की दवा मिलाकर लड़की को बेहोश करने के बाद उसके साथ न केवल बलात्कार किया जाता है, जिसे डेट रेप की संज्ञा दी गई है।
इसके अलावा संभावना यह भी होती है कि उसके नग्न वीडियो भी बना लिए गए हों जिसका दुरुपयोग बाद में वह पुरुष उस लड़की को ब्लैकमेल करने के लिए कर सकता है। ऐसी नशीली दवाओं को डेट रेप ड्रग्स कहा जाता है।
डेट रेप ड्रग एक प्रकार की नशीली दवा होती है जो व्यक्ति को बेहोश कर सकती है या ऐसी स्थिति में पहुँचा सकती है जिसमें व्यक्ति का अपने शरीर पर कोई नियंत्रण नहीं रह जाता। व्यक्ति पूरी तरह बेहोश भी नहीं होता पर उसका शरीर उसके बस में नहीं रह जाता। इस तरह की नशीली दवा को सबसे बेहतर तरीके से शराब में मिलाकर पिला दिया जाता है।
इन नशीली दवाओं का दुरुपयोग उन मामलों से जुड़ा हुआ पाया गया जहाँ दो लोग डेटिंग कर रहे थे इसलिए इन दवाओं को डेट रेप ड्रग कहा जाता है।
सोशल मीडिया जहाँ हमें और आपको एक दूसरे से और दुनिया से जोड़ता है और इसके अनेकों फायदे हैं, वहीं इसका दुरुपयोग भी जमकर होता है। बातें करने या जुड़ने के लिए कई सोशल प्लेटफ़ॉर्म उपलब्ध है। इसके अलावा डेटिंग साइट्स और मैट्रीमोनियल साइट्स भी उपलब्ध हैं। कई लोग इन सोशल प्लेटफ़ॉर्म पर मित्र बनते हैं या परिचय में आते हैं।
यही परिचय कभी कभार नुकसानदायक भी सिद्ध हो जाता है। डेटिंग या दोस्ती के बहाने लड़कियाँ विश्वास करते हुए लड़कों से मिलती हैं और न चाहते हुए भी उन्हें डेट रेप का शिकार बना लिया जाता है।
महिलाओं के लिए असुरक्षा हर जगह है। इसलिए उनका घर बैठ जाना कोई समाधान नहीं होता। ऐसा भी संभव नहीं कि महिलाएँ सोशल मीडिया का इस्तेमाल न करें और भला क्यों न करें। किसी से दोस्ती करना या डेटिंग करना भी स्वास्थ्यवर्धक ही है।
ऐसे में हमें और भी सजग और सचेत रहना होगा :
NCRB की 2019 रिपोर्ट के अनुसार भारत में महिलाओं पर हुए अपराध की संख्या 4 लाख से भी ऊपर रिपोर्ट की गई। जिसमें से 32,033 मामले केवल बलात्कार के हैं और यह उन सभी अपराधों का केवल 10% है।
जहाँ बलात्कार के मामले भी अदालत में सालों साल चलते हैं और पीड़िताओं को बराबर मानसिक रूप से उत्पीड़ित होना पड़ता है वहाँ डेट रेप की घटनाएँ महिलाओं के लिए मुश्किलें और बढ़ा देती हैं क्योंकि इन मामलों में महिला का उस पुरुष को जानना और अपनी मर्ज़ी से उससे मिलना शामिल होता है। इन मामलों में यह सिद्ध कर पाना बहुत मुश्किल होता है कि महिला और पुरुष के बीच उनकी मर्ज़ी से शारीरक संबंध नहीं बने बल्कि महिला का बलात्कार हुआ है।
यदि किसी लो लगता है कि किसी ने उन्हें डेट रेप का शिकार बनाया है, तो सबसे पहले किसी अपने से सहायता लें और जल्द से जल्द पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज़ कराएं। आप किसी अस्पताल में अपना यूरिन/ब्लड इत्यादि सैंपल भी दे सकते हैं। लेकिन ध्यान रहे ये सब सैंपल आपको बिना नहाये देना होगा।
सशक्त बनना और अपनी सुरक्षा के प्रति सजग रहना, किसी अंजान पर अंध विश्वास न करना और डेट या किसी पार्टी में जाने से पहले सही गलत का विचार कर लेना, यह पहली ज़िम्मेदारी अपने प्रति है।
कितनी दुखदाई परिस्थिति है कि जीवन के वो सामान्य पल जो पुरुष निसंकोच और मुक्त होकर जीता है, जीवन के उन्हीं छोटे-छोटे सुखों को जीने के लिए भी, उनका आनंद उठाने के लिए भी औरत को इतना सोच विचार करना पड़ता है। किसी से दोस्ती करना या किसी साथी को डेट करना भी एक औरत के लिए उसके जीवन में कितने ही सवाल और एहतियात खड़े कर देता है।
मूल चित्र: a still from short film Closure via YouTube (for representational purpose only)
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